हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.24.4

मंडल 10 → सूक्त 24 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 24
यु॒वं श॑क्रा माया॒विना॑ समी॒ची निर॑मन्थतम् । वि॒म॒देन॒ यदी॑ळि॒ता नास॑त्या नि॒रम॑न्थतम् ॥ (४)
हे शत्रुवधसमर्थ, बुद्धिमान्‌ एवं परस्पर मिले हुए अश्चिनीकुमारो! तुमने अरणिमंथन करके अग्नि को उत्पन्न किया था. हे सत्य रूप अश्विनीकुमारो! विमद की स्तुति सुनकर तुमने अरणि मथकर अग्नि जलाई. (४)
O enemy-loving, wise and interconnected aschinikumaro! You created the agni by aranimanthan. O true form Ashwinikumaro! On hearing the praise of Vimad, you lit the agni by churning arani mathkar. (4)