ऋग्वेद (मंडल 10)
नाहं तं वे॑द॒ य इति॒ ब्रवी॒त्यदे॑वयून्स॒मर॑णे जघ॒न्वान् । य॒दावाख्य॑त्स॒मर॑ण॒मृघा॑व॒दादिद्ध॑ मे वृष॒भा प्र ब्रु॑वन्ति ॥ (३)
इंद्र ने कहा-“मैं ऐसे किसी व्यक्ति को नहीं जानता जो यह कहता हो कि मैंने देवयज्ञ करने वालों को युद्ध में मारा है. मैं भयानक युद्ध में जाकर जब देवयज्ञ रहित लोगों का नाश करता हूं, तब विद्वान् लोग मेरे उस वीरकर्म का विस्तार से वर्णन करते हैं.” (३)
Indra said, "I don't know anyone who says that I have killed those who perform the godly offerings in battle. When I go to war and destroy people without godly offerings, scholars describe in detail my heroic deeds." (3)