हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.32.6

मंडल 10 → सूक्त 32 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 32
नि॒धी॒यमा॑न॒मप॑गूळ्हम॒प्सु प्र मे॑ दे॒वानां॑ व्रत॒पा उ॑वाच । इन्द्रो॑ वि॒द्वाँ अनु॒ हि त्वा॑ च॒चक्ष॒ तेना॒हम॑ग्ने॒ अनु॑शिष्ट॒ आगा॑म् ॥ (६)
देवों में उत्तम एवं यज्ञों की रक्षा करने वाले इंद्र ने अध्वर्यु द्वारा जल में निहित अग्नि के विषय में बताया है. हे अग्नि! विद्वान्‌ इंद्र ने तुम्हें बाद में देखा था, मैं उसी इंद्र के उपदेश के अनुसार तुम्हारे पास आया हूं. (६)
Indra, who is the best among the gods and protects the yagnas, has told about the agni contained in the water by Adhwaryu. O agni! The scholar Indra saw you later, I have come to you according to the teachings of the same Indra. (6)