ऋग्वेद (मंडल 10)
प्र मा॑ युयुज्रे प्र॒युजो॒ जना॑नां॒ वहा॑मि स्म पू॒षण॒मन्त॑रेण । विश्वे॑ दे॒वासो॒ अध॒ माम॑रक्षन्दुः॒शासु॒रागा॒दिति॒ घोष॑ आसीत् ॥ (१)
यजमानों को यज्ञकर्मो में नियुक्त करने वाले देवों ने मुझ कवष ऋषि को कुरुश्रवण के प्रति नियुक्त किया है. मैंने पूषा को मार्ग से वहन किया है. सभी देवों ने मेरी रक्षा की. चारों ओर यह हल्ला मचा हुआ था कि कठिनता से वश में आने वाला ऋषि आ गया है. (१)
The devas who appoint the hosts to the yagnakarmo have appointed my sage Kavsh to Kurushravana. I have borne Pusha by the way. All the gods protected me, and there was a hue and cry all around that the hard-to-do sage had come. (1)