ऋग्वेद (मंडल 10)
अधि॑ पुत्रोपमश्रवो॒ नपा॑न्मित्रातिथेरिहि । पि॒तुष्टे॑ अस्मि वन्दि॒ता ॥ (७)
हे दृष्टांतयोग्य कीर्ति वाले मित्रातिथि के पुत्र! तुम मेरे पास आओ. मैं तुम्हारे पिता का स्तोता हूं. (७)
O son of a friend of parable fame! You come to me. I am your father's hymn. (7)