ऋग्वेद (मंडल 10)
येन॑ सूर्य॒ ज्योति॑षा॒ बाध॑से॒ तमो॒ जग॑च्च॒ विश्व॑मुदि॒यर्षि॑ भा॒नुना॑ । तेना॒स्मद्विश्वा॒मनि॑रा॒मना॑हुति॒मपामी॑वा॒मप॑ दु॒ष्ष्वप्न्यं॑ सुव ॥ (४)
हे सूर्य देव! तुम जिस ज्योति से अंधकार का नाश करते हो एवं जिस किरण से सारे संसार को चमकाते हो, उसी के द्वारा हमारा अन्नाभाव, यज्ञहीनता, रोगसमूह एवं बुरे स्वप्न नष्ट करो. (४)
O Sun God! Destroy our annabhava, sacrificialism, disease and bad dreams through the light with which you destroy the darkness and the ray with which you make the whole world shine. (4)