ऋग्वेद (मंडल 10)
वि॒श्वाहा॑ त्वा सु॒मन॑सः सु॒चक्ष॑सः प्र॒जाव॑न्तो अनमी॒वा अना॑गसः । उ॒द्यन्तं॑ त्वा मित्रमहो दि॒वेदि॑वे॒ ज्योग्जी॒वाः प्रति॑ पश्येम सूर्य ॥ (७)
हे सूर्य देव! हम प्रसन्नमन, सुदर्शन, संतानयुक्त, रोगरहित एवं निष्पाप होकर सदा तुम्हारा यज्ञ करें. हे मित्रों का आदर करने वाले सूर्य! हम चिरंजीवी बनकर तुम्हें प्रतिदिन उदित होता हुआ देखें. (७)
O Sun God! Let us pray to you always with a pleasure, a sudarshan, a childless, disease-free and innocent. O sun that honors friends! We see you emerging every day by becoming chiranjeevi. (7)