ऋग्वेद (मंडल 10)
यस्य॑ ते॒ विश्वा॒ भुव॑नानि के॒तुना॒ प्र चेर॑ते॒ नि च॑ वि॒शन्ते॑ अ॒क्तुभिः॑ । अ॒ना॒गा॒स्त्वेन॑ हरिकेश सू॒र्याह्ना॑ह्ना नो॒ वस्य॑सावस्य॒सोदि॑हि ॥ (९)
हे हरे बालों वाले सूर्य! तुम्हारी जिस पहचान के कारण सभी प्राणी विशेष रूप से गति करते हैं और रात के समय विश्राम करते हैं, तुम अपनी पहचान को लेकर प्रतिदिन उगो एवं हम तुम्हें देखें. (९)
Oh, the green-haired sun! The identity of you because of which all beings move especially and rest at night, you rise daily with your identity and we see you. (9)