ऋग्वेद (मंडल 10)
यु॒वं श्वे॒तं पे॒दवे॑ऽश्वि॒नाश्वं॑ न॒वभि॒र्वाजै॑र्नव॒ती च॑ वा॒जिन॑म् । च॒र्कृत्यं॑ ददथुर्द्राव॒यत्स॑खं॒ भगं॒ न नृभ्यो॒ हव्यं॑ मयो॒भुव॑म् ॥ (१०)
हे अश्चिनीकुमारो! तुमने राजा पेदु के लिए निन्यानवे घोड़ों के साथ एक शक्तिशाली घोड़ा दिया था. वह घोड़ा शत्रुओं पर विजय पाने वाला व शत्रुओं के मित्रों को भगाने वाला था. वह मनुष्यों के लिए आह्वान करने योग्य, सुखदाता एवं धन के समान सेवनीय था. (१०)
O aschinikumaro! You gave a mighty horse with ninety-nine horses to King Pedu. The horse was about to conquer the enemies and drive away the enemies' friends. He was as inviting to humans, pleasant and as palatable as wealth. (10)