ऋग्वेद (मंडल 10)
यु॒वं रथे॑न विम॒दाय॑ शु॒न्ध्युवं॒ न्यू॑हथुः पुरुमि॒त्रस्य॒ योष॑णाम् । यु॒वं हवं॑ वध्रिम॒त्या अ॑गच्छतं यु॒वं सुषु॑तिं चक्रथुः॒ पुरं॑धये ॥ (७)
हे अश्विनीकुमारो! तुम पुरुमित्र की कन्या शुंध्युव को विमद के साथ विवाह करने के लिए रथ द्वारा ले गए थे. तुम वध्रिमती द्वारा बुलाए जाने पर आए थे एवं तुमने उस बुद्धिमती के लिए शोभन ऐश्वर्य दिया था. (७)
O Ashwinikumaro! You were taken by chariot to Shundyuv, the daughter of Purumitra, to marry Vimad. You came when you were called by Vadrimati and you gave a glorious glory to that wisdom. (7)