ऋग्वेद (मंडल 10)
न तस्य॑ विद्म॒ तदु॒ षु प्र वो॑चत॒ युवा॑ ह॒ यद्यु॑व॒त्याः क्षेति॒ योनि॑षु । प्रि॒योस्रि॑यस्य वृष॒भस्य॑ रे॒तिनो॑ गृ॒हं ग॑मेमाश्विना॒ तदु॑श्मसि ॥ (११)
हे अश्विनीकुमारो! मैं पतिपत्नी के संसर्ग वाले सुख को नहीं जानती. मुझे उस विषय में बताओ. मुझ युवती के घर में मेरा युवा पति निवास करता है. मैं केवल यही कामना करती हूं कि मैं प्रिय, युवतियों को चाहने वाले एवं शक्तिशाली पति को प्राप्त करूं. (११)
O Ashwinikumaro! I don't know the pleasure of husband and wife's infancy. Tell me about that. My young husband resides in my young woman's house. I only wish that I could have a beloved, young woman-loving and powerful husband. (11)