ऋग्वेद (मंडल 10)
वयो॒ न वृ॒क्षं सु॑पला॒शमास॑द॒न्सोमा॑स॒ इन्द्रं॑ म॒न्दिन॑श्चमू॒षदः॑ । प्रैषा॒मनी॑कं॒ शव॑सा॒ दवि॑द्युतद्वि॒दत्स्व१॒॑र्मन॑वे॒ ज्योति॒रार्य॑म् ॥ (४)
पक्षी जिस प्रकार शोभन पत्तों वाले वृक्षों का सहारा लेते हैं, उसी प्रकार नशा करने वाले एवं पात्रों में भरे हुए सोम इंद्र के पास जाते हैं. सोम के नशे से इंद्र का मुख चमकने लगता है. इंद्र मनुष्यों के लिए सूर्य नामक उत्तम ज्योति दें. (४)
Just as birds resort to trees with sociable leaves, so do drunkards and loaded in characters go to Som Indra. Indra's face begins to glow from Som's intoxication. Indra give the perfect light called the Sun to humans. (4)