हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.43.6

मंडल 10 → सूक्त 43 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 43
विशं॑विशं म॒घवा॒ पर्य॑शायत॒ जना॑नां॒ धेना॑ अव॒चाक॑श॒द्वृषा॑ । यस्याह॑ श॒क्रः सव॑नेषु॒ रण्य॑ति॒ स ती॒व्रैः सोमैः॑ सहते पृतन्य॒तः ॥ (६)
धनस्वामी इंद्र प्रत्येक मनुष्य में सोते हैं. अभिलाषापूरक इंद्र मनुष्यों की स्तुतियों पर ध्यान देते हैं. शक्र जिसके यज्ञों में रमण करते हैं, वह नशीला सोमरस पीकर शत्रुओं को पराजित करता है. (६)
Indra, the wealthowner, sleeps in every human being. The wishful Indra pays attention to the praises of human beings. The one in whose sacrifices The Shakra performs Raman, he defeats the enemies by drinking the intoxicating Someras. (6)