ऋग्वेद (मंडल 10)
प्र स॒प्तगु॑मृ॒तधी॑तिं सुमे॒धां बृह॒स्पतिं॑ म॒तिरच्छा॑ जिगाति । य आ॑ङ्गिर॒सो नम॑सोप॒सद्यो॒ऽस्मभ्यं॑ चि॒त्रं वृष॑णं र॒यिं दाः॑ ॥ (६)
मैं सात गायों का स्वामी, सत्यकर्मो वाला, शोभन बुद्धियुक्त एवं विशाल मंत्रों का स्वामी हूं. देवों की स्तुति मेरे पास आती है. अंगिरा गोत्र में उत्पन्न मैं नमस्कार के साथ देवों के पास जाता हूं. हे इंद्र! तुम हमें वर्षक एवं विचित्र धन दो. (६)
I am the lord of seven cows, the one with truth, the master of the brave intellect and the master of huge mantras. The praise of the gods comes to me. Born in the Angira tribe, I go to the gods with salutations. O Indra! You give us annual and strange money. (6)