हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.48.11

मंडल 10 → सूक्त 48 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 48
आ॒दि॒त्यानां॒ वसू॑नां रु॒द्रिया॑णां दे॒वो दे॒वानां॒ न मि॑नामि॒ धाम॑ । ते मा॑ भ॒द्राय॒ शव॑से ततक्षु॒रप॑राजित॒मस्तृ॑त॒मषा॑ळ्हम् ॥ (११)
मैं इंद्र, आदित्यो, वसुओं एवं रुद्रदेवों का स्थान नष्ट नहीं करता हूं. इन देवों ने मुझ अपराजित, अहिंसित एवं न झुकने वाले इंद्र को कल्याण एवं अन्न के लिए बनाया था. (११)
I do not destroy the place of Indra, Aditya, Vasuon and Rudradeva. These gods had made me an undefeated, non-violent and unshakable Indra for well-being and food. (11)