ऋग्वेद (मंडल 10)
अश्म॑न्वती रीयते॒ सं र॑भध्व॒मुत्ति॑ष्ठत॒ प्र त॑रता सखायः । अत्रा॑ जहाम॒ ये अस॒न्नशे॑वाः शि॒वान्व॒यमुत्त॑रेमा॒भि वाजा॑न् ॥ (८)
अश्मन्वती नामक नदी बह रही है. यज्ञ में आने के लिए इस नदी को पार करने हेतु उठो और इसे पार कर जाओ. हे मित्र बने हुए देवो! हम असुख को त्याग कर नदी पार करें और सुखकर अन्नों को पावें. (८)
The river named Ashmanvati is flowing. Get up to cross this river to come to the yagna and cross it. O friends, God! Let us leave the unsung and cross the river and find the grains happily. (8)