हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.57.6

मंडल 10 → सूक्त 57 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 57
व॒यं सो॑म व्र॒ते तव॒ मन॑स्त॒नूषु॒ बिभ्र॑तः । प्र॒जाव॑न्तः सचेमहि ॥ (६)
हे सोमदेव! हम तुम्हारे कर्म एवं शरीर में मन लगावें एवं संतानयुक्त होकर तुम्हारे काम में लगें. (६)
O Somdev! Let us put our mind into your work and body and be children and engage in your work. (6)