ऋग्वेद (मंडल 10)
व॒यं सो॑म व्र॒ते तव॒ मन॑स्त॒नूषु॒ बिभ्र॑तः । प्र॒जाव॑न्तः सचेमहि ॥ (६)
हे सोमदेव! हम तुम्हारे कर्म एवं शरीर में मन लगावें एवं संतानयुक्त होकर तुम्हारे काम में लगें. (६)
O Somdev! Let us put our mind into your work and body and be children and engage in your work. (6)