ऋग्वेद (मंडल 10)
यत्ते॒ पराः॑ परा॒वतो॒ मनो॑ ज॒गाम॑ दूर॒कम् । तत्त॒ आ व॑र्तयामसी॒ह क्षया॑य जी॒वसे॑ ॥ (११)
तुम्हारा जो मन अतिशय परवर्ती स्थानों में दूर तक चला गया है, उसे हम वापस बुलाते हैं. तुम इस संसार में निवास करने के लिए जीते हो. (११)
We call back your mind which has gone far and wide in the most distant places. You live to inhabit this world. (11)