हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.59.5

मंडल 10 → सूक्त 59 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 59
असु॑नीते॒ मनो॑ अ॒स्मासु॑ धारय जी॒वात॑वे॒ सु प्र ति॑रा न॒ आयुः॑ । रा॒र॒न्धि नः॒ सूर्य॑स्य सं॒दृशि॑ घृ॒तेन॒ त्वं त॒न्वं॑ वर्धयस्व ॥ (५)
हे असुनीतिदेवी! हम पर कृपा करो और जीवित रहने के लिए हमारी आयु भली प्रकार बढ़ाओ. हमें सूर्य के चिरदर्शन के लिए स्थापित करो. तुम हमारे दिए हुए घी से अपना शरीर बढ़ाओ. (५)
This is aunitidevi! Have mercy on us and raise our lifespan well to survive. Set us up for the perennial vision of the sun. You enlarge your body with the ghee we have given. (5)