ऋग्वेद (मंडल 10)
त्रिः स॒प्त स॒स्रा न॒द्यो॑ म॒हीर॒पो वन॒स्पती॒न्पर्व॑ताँ अ॒ग्निमू॒तये॑ । कृ॒शानु॒मस्तॄ॑न्ति॒ष्यं॑ स॒धस्थ॒ आ रु॒द्रं रु॒द्रेषु॑ रु॒द्रियं॑ हवामहे ॥ (८)
हम यज्ञ में सोम की रक्षा के निमित्त इक्कीस जल वाली विशाल वनस्पतियों, पर्वतों अग्नि, कृशानु नामक सोमपालक गंधर्व, बाण चलाने वाले गंधर्वो, नक्षत्रों व स्तुतियोग्य रुद्र को बुलाते हैं. (८)
We call the huge vegetation of twenty-one water, the mountains agni, the sompalak Gandharva named Krishnanu, the arrow-wielding Gandharvo, the nakshatras and the praiseworthy Rudra to protect Som in the yajna. (8)