हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.65.12

मंडल 10 → सूक्त 65 → श्लोक 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 65
भु॒ज्युमंह॑सः पिपृथो॒ निर॑श्विना॒ श्यावं॑ पु॒त्रं व॑ध्रिम॒त्या अ॑जिन्वतम् । क॒म॒द्युवं॑ विम॒दायो॑हथुर्यु॒वं वि॑ष्णा॒प्वं१॒॑ विश्व॑का॒याव॑ सृजथः ॥ (१२)
हे अश्चिनीकुमारो! तुमने भुज्यु को उपद्रवकारी समुद्र से बचाया, वध्रिमती को सोने के रंग वाला पुत्र दिया, विमद ऋषि को कामोद्दीपक पत्नी दी तथा विश्वक ऋषि को विष्णाप्व नामक पुत्र दिया. (१२)
O aschinikumaro! You saved Bhujyu from the troubled sea, gave the bride a son with a golden colour, gave the sage Vimad an aphrodisiac wife and gave the vishwaka sage a son named Vishnapav. (12)