हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.65.6

मंडल 10 → सूक्त 65 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 65
या गौर्व॑र्त॒निं प॒र्येति॑ निष्कृ॒तं पयो॒ दुहा॑ना व्रत॒नीर॑वा॒रतः॑ । सा प्र॑ब्रुवा॒णा वरु॑णाय दा॒शुषे॑ दे॒वेभ्यो॑ दाशद्ध॒विषा॑ वि॒वस्व॑ते ॥ (६)
मेरी जो दुधारू व यज्ञसंपादिका गाय बिना प्रार्थना के यज्ञ में आती है, वह वरुण को हव्य देने वाले तथा अन्न द्वारा अन्य देवों की सेवा करने वाले मेरी रक्षा करें. मैं उस गाय की स्तुति करता हूं. (६)
Let the milch and sacrificial cow that comes to the yagna without prayer protect me from those who give a vow to Varuna and serve other gods through food. I praise that cow. (6)