हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.66.3

मंडल 10 → सूक्त 66 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 66
इन्द्रो॒ वसु॑भिः॒ परि॑ पातु नो॒ गय॑मादि॒त्यैर्नो॒ अदि॑तिः॒ शर्म॑ यच्छतु । रु॒द्रो रु॒द्रेभि॑र्दे॒वो मृ॑ळयाति न॒स्त्वष्टा॑ नो॒ ग्नाभिः॑ सुवि॒ताय॑ जिन्वतु ॥ (३)
इंद्र वसुओं के साथ हमारे घर की रक्षा करें. अदिति देवों के साथ हमारा कल्याण करें. रुद्रदेव मरुतों के साथ हमें सुखी करें. त्वष्टा अपनी पत्नियों के साथ हमें अभ्युदय के लिए प्रसन्न करें. (३)
Protect our home with Indra Vasus. May Aditi do us well with the devas. May Rudradev make us happy with the maruts. May the tattva please us with your wives for abhyudaya. (3)