हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.67.1

मंडल 10 → सूक्त 67 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 67
इ॒मां धियं॑ स॒प्तशी॑र्ष्णीं पि॒ता न॑ ऋ॒तप्र॑जातां बृह॒तीम॑विन्दत् । तु॒रीयं॑ स्विज्जनयद्वि॒श्वज॑न्यो॒ऽयास्य॑ उ॒क्थमिन्द्रा॑य॒ शंस॑न् ॥ (१)
हमारे पिता अंगिरा ने सत्य से उत्पन्न एवं सात छंदों वाली विशाल स्तुति को बनाया था. सर्वजनहितकारी अयास्य ऋषि ने इंद्र की प्रशंसा करते हुए एक चरण वाला स्तोत्र भी बनाया. (१)
Our father Angira created a vast praise of truth and with seven verses. Sage Ayasya, who is all-powerful, also made a one-stage hymn praising Indra. (1)