ऋग्वेद (मंडल 10)
वि॒भिद्या॒ पुरं॑ श॒यथे॒मपा॑चीं॒ निस्त्रीणि॑ सा॒कमु॑द॒धेर॑कृन्तत् । बृह॒स्पति॑रु॒षसं॒ सूर्यं॒ गाम॒र्कं वि॑वेद स्त॒नय॑न्निव॒ द्यौः ॥ (५)
बृहस्पति रात भर सोते रहे. प्रातः उन्होंने गुहा का पिछला भाग तोड़ा तथा बादल के समान राक्षस की उस गुफा के तीनों द्वार खोल दिए. बृहस्पति ने प्रातःकाल सूर्य एवं गायों को एक साथ देखा. बृहस्पति उस समय मेघ के समान गर्जन कर रहे थे. (५)
Jupiter slept all night. In the morning, they broke the back of the cavity and opened the three gates of that cave of the monster like a cloud. Jupiter saw the sun and the cows together in the morning. Jupiter was roaring like a cloud at that time. (5)