हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.68.8

मंडल 10 → सूक्त 68 → श्लोक 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 68
अश्नापि॑नद्धं॒ मधु॒ पर्य॑पश्य॒न्मत्स्यं॒ न दी॒न उ॒दनि॑ क्षि॒यन्त॑म् । निष्टज्ज॑भार चम॒सं न वृ॒क्षाद्बृह॒स्पति॑र्विर॒वेणा॑ वि॒कृत्य॑ ॥ (८)
बृहस्पति ने पर्वत में बंद मधुर गायों को इस प्रकार देखा, जिस प्रकार थोड़े जल में मछलियां विकल दिखाई देती हैं. जिस प्रकार पेड़ की लकड़ी से सोमरस का पात्र चमस निकाला जाता है, उसी प्रकार बृहस्पति ने पर्वत से गायों को बाहर निकाला. (८)
Jupiter saw the sweet cows locked in the mountain in such a way that fish are seen in a little water. Just as the pot of somras is taken out of the wood of the tree, the spoon of the somras is extracted, so jupiter pulled out the cows from the mountain. (8)