हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.69.4

मंडल 10 → सूक्त 69 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 69
यं त्वा॒ पूर्व॑मीळि॒तो व॑ध्र्य॒श्वः स॑मी॒धे अ॑ग्ने॒ स इ॒दं जु॑षस्व । स नः॑ स्ति॒पा उ॒त भ॑वा तनू॒पा दा॒त्रं र॑क्षस्व॒ यदि॒दं ते॑ अ॒स्मे ॥ (४)
हे अग्नि! पहले तुम्हें स्तोता वध्यश्च ने प्रज्वलित किया था. तुम हमारा स्तोत्र स्वीकार करो. तुम हमारे घर और शरीर के रक्षक बनो. तुमने हमें जो कुछ दिया है, उसकी रक्षा करो. (४)
O agni! First you were ignited by Stota Vadhish. You accept our hymn. You become the protector of our home and body. Protect what you have given us. (4)