ऋग्वेद (मंडल 10)
दे॒वी दि॒वो दु॑हि॒तरा॑ सुशि॒ल्पे उ॒षासा॒नक्ता॑ सदतां॒ नि योनौ॑ । आ वां॑ दे॒वास॑ उशती उ॒शन्त॑ उ॒रौ सी॑दन्तु सुभगे उ॒पस्थे॑ ॥ (६)
द्योतमान, द्युलोक की पुत्रियों के समान एवं शोभनरूप वाले दिन-रात यज्ञ के स्थान में बैठे. हे अभिलाषा करने वाली एवं शोभन धन से युक्त देवियो! तुम्हारे शोभन एवं विस्तृत स्थान में हव्य के इच्छुक देवगण बैठे. (६)
Dyotman, like the daughters of Dulok, sat in the place of the yagna day and night, with a form of adornment. O ladies who desire and have riches! In your adornment and wide space sit the devgans desirous of the havya. (6)