हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.74.1

मंडल 10 → सूक्त 74 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 74
वसू॑नां वा चर्कृष॒ इय॑क्षन्धि॒या वा॑ य॒ज्ञैर्वा॒ रोद॑स्योः । अर्व॑न्तो वा॒ ये र॑यि॒मन्तः॑ सा॒तौ व॒नुं वा॒ ये सु॒श्रुणं॑ सु॒श्रुतो॒ धुः ॥ (१)
देवों व मानवों द्वारा धनदान के इच्छुक इंद्र को धनदान के लिए स्तुतियों या यज्ञ द्वारा आकर्षित किया जाता है. संग्राम में धन कमाने के साधन घोड़े इंद्र को आकर्षित करते हैं. यज्ञ का आश्रय लेने वाले अथवा शत्रु का संहार करने वाले लोग इंद्र को आकर्षित करते हैं. (१)
Indra, who is desirous of giving wealth by gods and human beings, is attracted by praises or yagnas for dhandaan. The means of earning money in sangram attract horses Indra. Those who take shelter in yajna or kill the enemy attract Indra. (1)