हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.77.5

मंडल 10 → सूक्त 77 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 77
यू॒यं धू॒र्षु प्र॒युजो॒ न र॒श्मिभि॒र्ज्योति॑ष्मन्तो॒ न भा॒सा व्यु॑ष्टिषु । श्ये॒नासो॒ न स्वय॑शसो रि॒शाद॑सः प्र॒वासो॒ न प्रसि॑तासः परि॒प्रुषः॑ ॥ (५)
हे मरुतो! तुम रथ की रस्सी से बंधे हुए घोड़ों के समान गतिशील एवं प्रातःकालीन प्रकाश के समान तेजस्वी हो. तुम श्येन पक्षी के समान शत्रुओं का नाश करके यश प्राप्त करते हो तथा पथिकों के समान चारों ओर घूम-घूमकर जल बरसाते हो. (५)
O Maruto! You are as moving as the horses tied to the rope of the chariot and as bright as the morning light. You achieve success by destroying your enemies like a lion bird and walking around like a pathkis and raining water. (5)