ऋग्वेद (मंडल 10)
अ॒ग्निर्दा॒द्द्रवि॑णं वी॒रपे॑शा अ॒ग्निरृषिं॒ यः स॒हस्रा॑ स॒नोति॑ । अ॒ग्निर्दि॒वि ह॒व्यमा त॑ताना॒ग्नेर्धामा॑नि॒ विभृ॑ता पुरु॒त्रा ॥ (४)
प्रेरक ज्वालाओं वाले अग्नि धन देते हैं. वे हजारों गायों वाले ऋषियों को पुत्र देते हैं, यजमानों का दिया हुआ हवि द्युलोक में पहुंचाते हैं एवं धरती पर अनेक रूप धारण करते हैं. (४)
Fire with inductive flames give wealth. They give sons to sages with thousands of cows, deliver the given gifts of hosts to Dulok and take many forms on earth. (4)