हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.85.33

मंडल 10 → सूक्त 85 → श्लोक 33 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 85
सु॒म॒ङ्ग॒लीरि॒यं व॒धूरि॒मां स॒मेत॒ पश्य॑त । सौभा॑ग्यमस्यै द॒त्त्वायाथास्तं॒ वि परे॑तन ॥ (३३)
यह वधू सौभाग्यशालिनी हो. सब लोग एकत्र होकर इसे देखें. सब लोग इसे सौभाग्य का आशीर्वाद देकर अपने-अपने घर जावें. (३३)
Let this bride be lucky. Everyone got together and watched it. Let everyone go to their homes by blessing it with good fortune. (33)