हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.85.38

मंडल 10 → सूक्त 85 → श्लोक 38 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 85
तुभ्य॒मग्रे॒ पर्य॑वहन्सू॒र्यां व॑ह॒तुना॑ स॒ह । पुनः॒ पति॑भ्यो जा॒यां दा अ॑ग्ने प्र॒जया॑ स॒ह ॥ (३८)
हे अग्नि! सूर्या को वस्त्र ओढ़ाकर सबसे पहले तुम्हारे ही समीप लाया जाता है. तुम पत्नी को संतानसहित पति के लिए देते हो. (३८)
O agni! Surya is brought close to you first by wearing a sheet. You give the wife to the husband with the children. (38)