हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.85.5

मंडल 10 → सूक्त 85 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 85
यत्त्वा॑ देव प्र॒पिब॑न्ति॒ तत॒ आ प्या॑यसे॒ पुनः॑ । वा॒युः सोम॑स्य रक्षि॒ता समा॑नां॒ मास॒ आकृ॑तिः ॥ (५)
हे सोम! लोग तुम्हें तीनों सवनों में पीते हैं, इससे तुम बार-बार बढ़ते हो. वायु उसी प्रकार सोम की रक्षा करते हैं, जिस प्रकार वायु के समान आकार वाले मास, वर्ष की रक्षा करते हैं. (५)
Hey Mon! People drink you in all three gardens, so that you grow again and again. The air protects the mon in the same way as the mass of the same size as the air protects the year. (5)