हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.85.8

मंडल 10 → सूक्त 85 → श्लोक 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 85
स्तोमा॑ आसन्प्रति॒धयः॑ कु॒रीरं॒ छन्द॑ ओप॒शः । सू॒र्याया॑ अ॒श्विना॑ व॒राग्निरा॑सीत्पुरोग॒वः ॥ (८)
स्तोत्र सूर्या के रथ के पहियों के अरे थे. कुरीर नामक छंद उस रथ का भीतरी भाग था. अश्विनीकुमार सूर्या के वर एवं अग्नि उसके आगे चलने वाले थे. (८)
The hymns were hey of the wheels of Surya's chariot. The verse called Kurir was the inner part of that chariot. Ashwinikumar Surya's groom and agni were about to walk ahead of him. (8)