हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.89.15

मंडल 10 → सूक्त 89 → श्लोक 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 89
श॒त्रू॒यन्तो॑ अ॒भि ये न॑स्तत॒स्रे महि॒ व्राध॑न्त ओग॒णास॑ इन्द्र । अ॒न्धेना॒मित्रा॒स्तम॑सा सचन्तां सुज्यो॒तिषो॑ अ॒क्तव॒स्ताँ अ॒भि ष्युः॑ ॥ (१५)
हे इंद्र! जिन राक्षसों ने हमारे प्रति शत्रुभाव रखकर हमें बाधा पहुंचाई है एवं एकत्र होकर जिन्होंने हमें घेर लिया है, वे गहरे अंधकार में डूब जावें. उनके लिए ज्योति वाली रात भी अंधेरी हो जाए. (१५)
O Indra! Let the demons who have interrupted us by hostile to us and who have gathered together and surrounded us, drown in deep darkness. Let the night of light also become dark for them. (15)