हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.90.12

मंडल 10 → सूक्त 90 → श्लोक 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 90
ब्रा॒ह्म॒णो॑ऽस्य॒ मुख॑मासीद्बा॒हू रा॑ज॒न्यः॑ कृ॒तः । ऊ॒रू तद॑स्य॒ यद्वैश्यः॑ प॒द्भ्यां शू॒द्रो अ॑जायत ॥ (१२)
ब्राह्मण इनका मुख हुआ. क्षत्रिय को भुजाएं बनाया गया. इनकी दोनों जंघाओं से वैश्य और चरणों से शूद्र उत्पन्न हुए. (१२)
The Brahmins were their faces. The kshatriya was made arms. From both their thighs came the Vaishyas and from the feet the Shudras were born. (12)