हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.93.1

मंडल 10 → सूक्त 93 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 93
महि॑ द्यावापृथिवी भूतमु॒र्वी नारी॑ य॒ह्वी न रोद॑सी॒ सदं॑ नः । तेभि॑र्नः पातं॒ सह्य॑स ए॒भिर्नः॑ पातं शू॒षणि॑ ॥ (१)
हे द्यावा-पृथिवी! तुम महान्‌ बनो. तुम विस्तीर्ण बनो और नारी के समान हमारे घर में स्थित होओ. तुम अपने रक्षासाधनों से हमें शत्रुओं से बचाओ. तुम अपने इन कार्यों से हमें शत्रुओं से बचाओ. (१)
This is the earth! You be great. Be you wide and be located in our house like a woman. You save us from enemies by your defense tools. You save us from your enemies by these actions. (1)