ऋग्वेद (मंडल 10)
ते घा॒ राजा॑नो अ॒मृत॑स्य म॒न्द्रा अ॑र्य॒मा मि॒त्रो वरु॑णः॒ परि॑ज्मा । कद्रु॒द्रो नृ॒णां स्तु॒तो म॒रुतः॑ पू॒षणो॒ भगः॑ ॥ (४)
अर्यमा, मित्र, सर्वत्रगामी वरुण अन्य देवों के ऋत्विजों द्वारा प्रशंसित रुद्र, पूषा, मरुत् एवं भग अमृत सदृश हवि के स्वामी, सबके स्तुतियोग्य एवं मानवों को सुख देने वाले हैं. (४)
Aryama, Mitra, All-Round Varuna, the lord of The Lord of Havi, like Rudra, Pusha, Marutta and Bhaga Amrit, admired by the sages of other gods, is praiseworthy to all and give happiness to human beings. (4)