हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.93.8

मंडल 10 → सूक्त 93 → श्लोक 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 93
ऋ॒भुरृ॑भु॒क्षा ऋ॒भुर्वि॑ध॒तो मद॒ आ ते॒ हरी॑ जूजुवा॒नस्य॑ वा॒जिना॑ । दु॒ष्टरं॒ यस्य॒ साम॑ चि॒दृध॑ग्य॒ज्ञो न मानु॑षः ॥ (८)
हे महान्‌ इंद्र! तुम एवं तुम्हारी सेवा करने वाले यजमान का हर्ष यज्ञ से सुशोभित होता है. यज्ञ के प्रति तुम शीघ्र आते हो एवं तुम्हारे घोड़े शक्तिशाली हैं. तुम्हारे लिए गाया जाने वाला साम राक्षसों द्वारा दुस्तर है. तुम्हारा दिव्य यज्ञ मानवों द्वारा साध्य नहीं है. (८)
O great Indra! The joy of you and the host who serves you is adorned with yajna. You come quickly to the yagna and your horses are powerful. The sama sung for you is dustar by the demons. Your divine yajna is not attainable by humans. (8)