ऋग्वेद (मंडल 10)
ते सो॒मादो॒ हरी॒ इन्द्र॑स्य निंसतें॒ऽशुं दु॒हन्तो॒ अध्या॑सते॒ गवि॑ । तेभि॑र्दु॒ग्धं प॑पि॒वान्सो॒म्यं मध्विन्द्रो॑ वर्धते॒ प्रथ॑ते वृषा॒यते॑ ॥ (९)
सोमरस का भक्षण करने वाले ये पत्थर इंद्र के घोड़ों को प्राप्त करते हैं. इनका रस निकलकर गोचर्म के ऊपर जाता है. इन पत्थरों द्वारा निकाले हुए मधुर सोमरस को पीकर इंद्र बढ़ते हैं, विस्तृत होते हैं एवं सांड़ के समान शक्ति दिखाते हैं. (९)
These stones that feed on somras receive Indra's horses. Their juice comes out and goes over the gocharm. By drinking the sweet somras extracted by these stones, Indra grows, expands and shows the power of the same as a sand. (9)