ऋग्वेद (मंडल 2)
धा॒रय॑न्त आदि॒त्यासो॒ जग॒त्स्था दे॒वा विश्व॑स्य॒ भुव॑नस्य गो॒पाः । दी॒र्घाधि॑यो॒ रक्ष॑माणा असु॒र्य॑मृ॒तावा॑न॒श्चय॑माना ऋ॒णानि॑ ॥ (४)
स्थावर एवं जंगम को धारण करते हुए आदित्य देव संपूर्ण संसार की रक्षा करते हैं विशाल यज्ञों के स्वामी वे आदित्य प्राण के हेलु जल की रक्षा करते हैं. वे सत्ययुक्त एवं स्तोताओं को ऋणरहित बनाने वाले हैं. (४)
Wearing sthavar and jangam, Aditya Dev protects the whole world, the lord of huge sacrifices, he protects the helu water of Aditya Prana. They are going to make truthful and hymns debtless. (4)