ऋग्वेद (मंडल 2)
सु॒गो हि वो॑ अर्यमन्मित्र॒ पन्था॑ अनृक्ष॒रो व॑रुण सा॒धुरस्ति॑ । तेना॑दित्या॒ अधि॑ वोचता नो॒ यच्छ॑ता नो दुष्परि॒हन्तु॒ शर्म॑ ॥ (६)
हे अर्यमा, मित्र एवं वरुण! तुम्हारा पथ सुगम, निष्कंटक एवं सुंदर है. हे आदित्यगण! हमें उसी मार्ग से ले चलो, मधुर वचन बोलो तथा हमें अविनाशी सुख प्रदान करो. (६)
O Aryama, friend and Varun! Your path is smooth, smooth and beautiful. Hey Adityagan! Lead us down the same path, speak sweet words and give us indestructible happiness. (6)