हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 2.27.9

मंडल 2 → सूक्त 27 → श्लोक 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 2)

ऋग्वेद: | सूक्त: 27
त्री रो॑च॒ना दि॒व्या धा॑रयन्त हिर॒ण्ययाः॒ शुच॑यो॒ धार॑पूताः । अस्व॑प्नजो अनिमि॒षा अद॑ब्धा उरु॒शंसा॑ ऋ॒जवे॒ मर्त्या॑य ॥ (९)
स्वर्णाभूषण धारण करने वाले, दीप्तियुक्त, पवित्र, निद्रारहित, निमेषहीन, असुरों द्वारा अहिंसित एवं सब लोगों द्वारा स्तुति योग्य अदितिपुत्र सरल मनुष्यों के लिए अग्नि, वायु एवं सूर्य तीन तेज धारण करते हैं. (९)
The son of Aditi, who wears a golden jewel, is radiant, holy, sleepless, nimeshless, unmindful by the asuras and admired by all people, the son of Aditi, who wears three bright ones, wears agni, air and sun for simple men. (9)