हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 2.31.6

मंडल 2 → सूक्त 31 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 2)

ऋग्वेद: | सूक्त: 31
उ॒त वः॒ शंस॑मु॒शिजा॑मिव श्म॒स्यहि॑र्बु॒ध्न्यो॒३॒॑ऽज एक॑पादु॒त । त्रि॒त ऋ॑भु॒क्षाः स॑वि॒ता चनो॑ दधे॒ऽपां नपा॑दाशु॒हेमा॑ धि॒या शमि॑ ॥ (६)
हे देवो! हम तुम्हारी स्तुति करने के इच्छुक हैं. तुम हमारी स्तुति को पंसद करो. अहिर्बुध्य, अजएकपात, सविता, ऋभुक्षा एवं त्रित हमें अन्न दें. जल के नाती, शीघ्रगामी अग्नि हमारे यज्ञकर्म से प्रसन्न हों. (६)
O God! We are willing to praise you. You like our praise. Give us food, Ahirbudhya, Ajekpat, Savita, Ribhuksha and Trit. Grandson of water, the fast-moving agni, be pleased with our yajna karma. (6)