ऋग्वेद (मंडल 2)
अर्ह॑न्बिभर्षि॒ साय॑कानि॒ धन्वार्ह॑न्नि॒ष्कं य॑ज॒तं वि॒श्वरू॑पम् । अर्ह॑न्नि॒दं द॑यसे॒ विश्व॒मभ्वं॒ न वा ओजी॑यो रुद्र॒ त्वद॑स्ति ॥ (१०)
हे पूज्य रुद्र! तुम बाण और धनुष धारण करते हो. हे पूजा योग्य! तुमने पूजनीय एवं बहुरूप वाले हार को धारण किया है. तुम इस विस्तृत संसार की रक्षा करते हो. तुम्हारी अपेक्षा अधिक शक्तिशाली कोई नहीं है. (१०)
O revered Rudra! You hold arrows and bows. O worshipable! You have worn a revered and polymorphic necklace. You protect this vast world. There is no one more powerful than yours. (10)