हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 2.37.5

मंडल 2 → सूक्त 37 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 2)

ऋग्वेद: | सूक्त: 37
अ॒र्वाञ्च॑म॒द्य य॒य्यं॑ नृ॒वाह॑णं॒ रथं॑ युञ्जाथामि॒ह वां॑ वि॒मोच॑नम् । पृ॒ङ्क्तं ह॒वींषि॒ मधु॒ना हि कं॑ ग॒तमथा॒ सोमं॑ पिबतं वाजिनीवसू ॥ (५)
हे अश्चिनीकुमारो! अपने वेगशाली), तुम्हें ढोने वाले एवं इस यज्ञ में पहुंचाने वाले रथ को इस यज्ञ में भली प्रकार जोड़ो, हमारा हव्य मधुयुक्त करो एवं यहां आओ. हे अन्नस्वामियो! हमारा सोमरस पिओ. (५)
O aschinikumaro! Add the chariot that carries you to this yajna well in this yajna, which is fast, and bring us to this yajna, and come here. O annaswamio! Drink our somras. (5)