ऋग्वेद (मंडल 2)
आ॒वद॒ँस्त्वं श॑कुने भ॒द्रमा व॑द तू॒ष्णीमासी॑नः सुम॒तिं चि॑किद्धि नः । यदु॒त्पत॒न्वद॑सि कर्क॒रिर्य॑था बृ॒हद्व॑देम वि॒दथे॑ सु॒वीराः॑ ॥ (३)
हे कपिंजल पक्षी! तुम शब्द करते समय हमारे लिए कल्याण की सूचना दो एवं मौन रहते समय हमारे प्रति सुमति की इच्छा करो. तुम उड़ते समय कर्करी बाजे के समान शब्द करते हो. हम शोभन पुत्र-पौत्र प्राप्त करके इस यज्ञ में बहुत सी स्तुतियां बोलेंगे. (३)
O cupinjal bird! When you say words, inform us of welfare and wish for our consent while remaining silent. You say the same words as the curvy baje while flying. We will receive shobhan son-grandson and speak many praises in this yajna. (3)