ऋग्वेद (मंडल 3)
आ नो॑ गहि स॒ख्येभिः॑ शि॒वेभि॑र्म॒हान्म॒हीभि॑रू॒तिभिः॑ सर॒ण्यन् । अ॒स्मे र॒यिं ब॑हु॒लं संत॑रुत्रं सु॒वाचं॑ भा॒गं य॒शसं॑ कृधी नः ॥ (१९)
हे सब जगह जाने के इच्छुक महान् अग्नि! कल्याणकारी सख्य एवं रक्षा के विशाल साधन लेकर हमारे पास आओ एवं विस्तीर्ण, उपद्रवों से रहित, शोभन वचन युक्त, सुभग तथा यशस्वी बनाओ. (१९)
O great agni willing to go everywhere! Come to us with a great means of welfare and protection and make us elaborate, free of disturbances, with a good word, good and successful. (19)