हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.12.6

मंडल 3 → सूक्त 12 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 12
इन्द्रा॑ग्नी नव॒तिं पुरो॑ दा॒सप॑त्नीरधूनुतम् । सा॒कमेके॑न॒ कर्म॑णा ॥ (६)
हे इंद्र और अग्नि! तुमने एक ही प्रयास में दासों के नब्बे नगरों को कंपित कर दिया था. (६)
O Indra and Agni! You had made ninety cities of enemies tremble in a single attempt. (6)